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Rahul Tufani / Palamu

Rahul Tufani

Rahul Tufani

Industry:
Bhojpuri And Hindi
City:
Palamu

QUICK OVERVIEW

  मै राहुल तुफानी..घर पंकरी थाना पाटन जीला पलामु के रहने वाला हुँ मुझे बच्पन से ही गाना गाने का सौख था लेकिन मेरी मजबूरी थी कि मेरे मम्मी-पापा बहुत ही गरीब थे। जब मैं दूसरी क्लास मे पढ़ रहा था उन दिनों मेरे घर में खाने-पीने के सामानों के लिए भी काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी। उन्हीं परिस्थितियों के बीच किसी तरह मैने कक्षा सात की पढ़ाई पूरी की।  परिवार की आर्थिक तंगी और भाई-बहन की जिंदगी को सुधारने के मकसद से मैने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने का निर्णय लिया।  दिसंबर 2005 में मैने लुधियाना का टिकट लिया और जनवरी 2006 में चला गया। मैंने वहां 1200 रुपये की सेलरी पर काम करना शुरू कर दिया। मेरी छोटी से नौकरी ने ही उस वक्त परिवार को खुश कर दिया। जब मैंने अपनी पहली सेलरी घर भेजा तो परिवार वाालों के खुशी का ठिकाना न था। उनके वह खुशी मैं कभी भूल नहीं सकता। मैंने दो साल पूरे मन से वहां काम किया तो मेरे परिवार की हालात सुधरने लगी। उसके बाद मैंने अपनी जिंदगी के लिए एक बड़ा फैसला किया और अपने मनपसंद मंजिल को पाने के लिए तैयारी करना शुरू कर दिया।  जुलाई 2017 में घर पर फोन लगाने के दौरान मुझसे एक रांग नंबर लग गया। मैंने सामने वाले से पूछा कि आप कौन तो उधर आवाज आई कि मैं हरियाली बोल रही हूं। बातचीत के दौरान पता दोनों ने एक दूसरे के बारे में जाना और उनके कहने पर मैने एलबल की तैयारी शुरू कर दी। मेरा पहला एल्बम तैयार करने पप्पू उपाध्या और सिकंदर दुबे के साथ मेरे पापा -मम्मी ने बहुत सहयोग किया। इन लोगों के सहयोग और आशिर्वाद से मैंने अपना पहला एल्बम लांच किया। आप लोगों का भी मुझे भरपूर सहयोग मिला जिसका परिणाम यह है कि आज मैं यहां आप लोगों के सामने हूं। आपके प्यार और सहयोग का मैं बहुत आभारी हूं और आगे भी उम्मीद करता हूं कि आपका यह स्नेह आगे भी मुझे मिलता रहेगा। आगे मैं निरंतर आपलोगों के समक्ष कुछ न कुछ नया लाता रहूंगा।   

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मै राहुल तुफानी..घर पंकरी थाना पाटन जीला पलामु के रहने वाला हुँ मुझे बच्पन से ही गाना गाने का सौख था लेकिन मेरी मजबूरी थी कि मेरे मम्मी-पापा बहुत ही गरीब थे। जब मैं दूसरी क्लास मे पढ़ रहा था उन दिनों मेरे घर में खाने-पीने के सामानों के लिए भी काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी। उन्हीं परिस्थितियों के बीच किसी तरह मैने कक्षा सात की पढ़ाई पूरी की।  परिवार की आर्थिक तंगी और भाई-बहन की जिंदगी को सुधारने के मकसद से मैने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने का निर्णय लिया। 

दिसंबर 2005 में मैने लुधियाना का टिकट लिया और जनवरी 2006 में चला गया। मैंने वहां 1200 रुपये की सेलरी पर काम करना शुरू कर दिया। मेरी छोटी से नौकरी ने ही उस वक्त परिवार को खुश कर दिया। जब मैंने अपनी पहली सेलरी घर भेजा तो परिवार वाालों के खुशी का ठिकाना न था। उनके वह खुशी मैं कभी भूल नहीं सकता। मैंने दो साल पूरे मन से वहां काम किया तो मेरे परिवार की हालात सुधरने लगी। उसके बाद मैंने अपनी जिंदगी के लिए एक बड़ा फैसला किया और अपने मनपसंद मंजिल को पाने के लिए तैयारी करना शुरू कर दिया। 

जुलाई 2017 में घर पर फोन लगाने के दौरान मुझसे एक रांग नंबर लग गया। मैंने सामने वाले से पूछा कि आप कौन तो उधर आवाज आई कि मैं हरियाली बोल रही हूं। बातचीत के दौरान पता दोनों ने एक दूसरे के बारे में जाना और उनके कहने पर मैने एलबल की तैयारी शुरू कर दी। मेरा पहला एल्बम तैयार करने पप्पू उपाध्या और सिकंदर दुबे के साथ मेरे पापा -मम्मी ने बहुत सहयोग किया। इन लोगों के सहयोग और आशिर्वाद से मैंने अपना पहला एल्बम लांच किया। आप लोगों का भी मुझे भरपूर सहयोग मिला जिसका परिणाम यह है कि आज मैं यहां आप लोगों के सामने हूं। आपके प्यार और सहयोग का मैं बहुत आभारी हूं और आगे भी उम्मीद करता हूं कि आपका यह स्नेह आगे भी मुझे मिलता रहेगा। आगे मैं निरंतर आपलोगों के समक्ष कुछ न कुछ नया लाता रहूंगा। 

 

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